वैदिक गणित के व्यावहारिक अनुप्रयोग: वर्गमूल के विशेष संदर्भ में
Author(s): राजीव अग्रवाल, प्रदीप कुमार, प्रमोद कुमार विश्वकर्मा
Abstract: आज हम बिना गणित के अपने जीवन में एक दिन की भी कल्पना नहीं कर सकते हैं, क्योंकि दैनिक जीवन की समस्याओं के हल के लिए भी हमें किसी न किसी रूप में गणित पर ही आश्रित रहना होता है। गणित अपने चारों ओर के वातावरण से हमें संपर्क करने व विश्व के प्रति हमारी समझ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साधन है। गणित किसी प्राकृतिक स्रोत के सामान हमारे चारों ओर है जिसे हम आसानी से अनुभव कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति चाहे वह मजदूर, किसान, व्यापारी, ग्रहणी, डॉक्टर तथा वकील हो वह प्रतिदिन गणित के अंकों और सिद्धांतों का उपयोग करता है। कार्यालय, अखबार, खेल का मैदान हर जगह गणित का अस्तित्व है, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जीविका कमाने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गणित की आवश्यकता होती है। हम अपने दैनिक जीवन की कई प्रकार की समस्याओं को गणित के माध्यम से आसानी से हल कर सकते हैं। परन्तु आज विद्यार्थियों में गणित के प्रति अरुचि तथा उनके कौशलों में कमी परिलक्षित होती है। अत: यदि सामान्य गणित के स्थान पर प्राचीन वैदिक गणित की सरलीकृत विधियाँ पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर दी जाएँ तो छात्र मनोरंजनकपूर्वक गणित का अध्ययन कर सकेंगे। वैदिक गणित अति सुंदर वैदिक सूत्रो का संग्रह है जो वेदों से लिया गया है। वैदिक गणित का मूल स्रोत अथर्ववेद है। और जिसकी पुन: प्रतिष्ठा खोज परम श्रद्धेय जगद्गुरु शंकराचार्य श्री भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज ने की। वैदिक गणित अंकगणित व बीजगणित की गणनाएं आसानी से करने में सहायक है।
गणित शिक्षण मे वर्गमूल का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रस्तुत शोध पत्र में वैदिक गणित की पद्धति द्वारा अत्यंत सरल ढंग से वर्गमूल हल करने की विधा पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है।
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How to cite this article:
राजीव अग्रवाल, प्रदीप कुमार, प्रमोद कुमार विश्वकर्मा. वैदिक गणित के व्यावहारिक अनुप्रयोग: वर्गमूल के विशेष संदर्भ में. Int J Multidiscip Trends 2023;5(7):01-06.