पैरासिम्पेथेटिक तंत्र सक्रियण, श्वसन दर व हृदय गति सामंजस्यता: काकी मुद्रा के परिपेक्ष में
Author(s): मयंक उनियाल, गजानन्द वानखेड़े
Abstract: वर्तमान समय नाना प्रकार की चुनौतियों से युक्त है | आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति को नित-प्रतिदिन शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक एवं अन्य प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिसका कुप्रभाव निश्चित ही सम्बंधित व्यक्ति अथवा परिवार को किसी न किसी रूप में देखने को मिलता है | ऐसी परिस्थिति में यह अति महत्वपूर्ण है कि किस प्रकार से स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से दृढ़, स्थिर एवं स्वस्थ रखा जाए | पैरासिम्पेथेटिक तंत्र, तंत्रिका तंत्र के मुख्य घटक स्वायत्त तंत्रिका तंत्र का एक प्रमुख भाग है जिसका सम्बन्ध विभिन्न अनैच्छिक शारीरिक क्रियाओं जैसे हृदय गति, श्वसन दर, पाचन यौन उत्तेजना आदि के नियमन से है | विज्ञान के अनुसार, स्वायत्त तंत्रिका तंत्र अंतर्गत अनैच्छिक क्रियाओं पर मनुष्य का प्रत्यक्ष रूप से किसी प्रकार का कोई नियंत्रण नहीं रहता है परन्तु उक्त क्रियाओं को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया जा सकता है | काकी मुद्रा विभिन्न हठ यौगिक ग्रंथों में वर्णित एक ऐसी मुद्रा है जिसके अभ्यास से जहाँ एक ओर शारीरिक एवं मानसिक स्थैर्य को प्राप्त किया जा सकता है वहीं दूसरी ओर पैरासिम्पेथेटिक तंत्र की जागृति कर, शरीर को विश्रामावस्था की ओर प्रेरित करते हुए नाना प्रकार के लाभ अर्जित किये जा सकते हैं | प्रस्तुत शोधपत्र में काकी मुद्रा द्वारा पैरासिम्पेथेटिक तंत्र के सक्रियण तथा इसके व हृदय-श्वसन तंत्र के मध्य की सामंजस्यता को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है।
मयंक उनियाल, गजानन्द वानखेड़े. पैरासिम्पेथेटिक तंत्र सक्रियण, श्वसन दर व हृदय गति सामंजस्यता: काकी मुद्रा के परिपेक्ष में. Int J Multidiscip Trends 2024;6(6):69-72. DOI: 10.22271/multi.2024.v6.i6a.739